फ़ेसबुक पर अनुसरण करें-

ग़ाफ़िल

My photo
Babhnan, Gonda, Uttar Pradesh, India

Wednesday, November 16, 2016

किनारा था मैं बौराई नदी का

थे मेरे होंट आरिज़ था किसी का
दबी आवाज़ भी आई के ई का?

अभी आए हुए दो पल न बीते
भरोसा ख़ाक दूँ इक ज़िन्दगी का

है बाबत जिसके उस नाज़ुक जिगर को
बता दूँ क्या है ख़स्ता हाल जी का

गुनाहे यार भी क्या क्या गिनाऊँ
मैं शाइर हूँ मगर है शह उसी का

अचनाक मौत पर मेरे न ग़म कर
किनारा था मैं बौराई नदी का

कभी रुख़सार तो ला पास मेरे
मज़ा पा जाएगा तश्नालबी का

तेरे लिखने का मानी कुछ न ग़ाफ़िल
न हो पाए वो गर बाइस ख़ुशी का

-‘ग़ाफ़िल’

No comments:

Post a Comment