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शनिवार, दिसंबर 17, 2016

होगा आगे जो भी देखा जाएगा

उठके जब मेरा जनाज़ा जाएगा
है यक़ीं इतना के तू आ जाएगा

बह्र से मिलने अब आगे देखिए
दर्या जाएगा के सोता जाएगा

कर दो बस साबित के उल्फ़त है गुनाह
फिर तो उसका लुत्फ़ बढ़ता जाएगा

राम जाने क्या हुआ जी को मेरे
दर से तेरे ही आवारा जाएगा

आप ग़ाफ़िल जी लिखे जाओ अश्आर
होगा आगे जो भी देखा जाएगा

-‘ग़ाफ़िल’

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (18-12-2016) को "जीने का नजरिया" (चर्चा अंक-2559) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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