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ग़ाफ़िल

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Babhnan, Gonda, Uttar Pradesh, India

Wednesday, September 23, 2020

ये भी देखो करिश्में होते हैं क्या क्या जवानी में

न यह पूछो के लग जाती है क्यूँकर आग पानी में
ये भी देखो करिश्में होते हैं क्या क्या जवानी में
मुझे होना ही गर था इश्क़ तो उससे हुआ क्यूँ जो
मचलती रहती थी हर सिम्त नानी की कहानी में

-‘ग़ाफ़िल’

(चित्र गूगल से साभार)

6 comments:

  1. ४ लाइन्स प्रकृति की शुद्ध हवा पर समर्पित

    https://helphindime.in/hindi-kavita-ek-savera-aur-thandi-hawa/

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  2. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 21 अक्टूबर 2020 को साझा की गयी है.............. पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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