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ग़ाफ़िल

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Babhnan, Gonda, Uttar Pradesh, India

Monday, December 07, 2020

अच्छा नहीं आया!!

बताएँ क्यूँ के हमको अब तलक क्या क्या नहीं आया
हाँ ये है सामने वाले को भरमाना नहीं आया

जो कहना था न कह पाए हों शायद हम सलीके से
है मुम्क़िन यह भी शायद उनको ही सुनना नहीं आया

अदा क़ातिल है ये भी उनके दर जाओ न तो उनका
बड़ी मासूमियत से बोलना अच्छा नहीं आया!!

कुछ और आसान हो जाता हमारा मरना उल्फ़त में
सुना जाता जो नामाबर के ख़त उनका नहीं आया

यक़ीनन लुत्फ़ आएगा जो चाहो तज़्रिबा कर लो
कोई ग़ाफ़िल कहे जब उनका संदेशा नहीं आया

-‘ग़ाफ़िल’

11 comments:

  1. मेरे ब्लॉग ग़ज़लयात्रा पर आपका स्वागत है। इसमें आप भी शामिल हैं-

    http://ghazalyatra.blogspot.com/2020/12/blog-post.html?m=1
    किसान | अन्नदाता | ग़ज़ल | शायरी
    ग़ज़लों के आईने में किसान
    सादर,
    - डॉ. वर्षा सिंह

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  2. जो कहना था न कह पाए हों शायद हम सलीके से
    है मुम्क़िन यह भी शायद उनको ही सुनना नहीं आया

    बेहतरीन...
    लाजवाब ग़ज़ल...
    🌹🙏🌹

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  3. यकीनन लुत्फ उठाया । आभार ।

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  4. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 31 मार्च 2021 को साझा की गयी है.............. पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  5. वाह , बहुत खूब ग़ज़ल । बहुत अर्से बाद आना हुआ आपके ब्लॉग पर ।

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  6. वाह ग़ाफ‍िल साहब की ग़ज़ल ...बहुत खूब ही कहा क‍ि ---कुछ और आसान हो जाता हमारा मरना उल्फ़त में
    सुना जाता जो नामाबर के ख़त उनका नहीं आया...लाजवाब

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