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ग़ाफ़िल

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Babhnan, Gonda, Uttar Pradesh, India

Friday, October 01, 2021

नाक भी बाकी रहे मै भी उड़ा ली जाए

थोड़ी शिक़्वों की शराब आपसे पा ली जाए

क्यूँ नहीं ऐसे भी कुछ बात बना ली जाए


आप तो वैसे भी मानेंगे नहीं अपनी कही

क़स्म ली जाए भी तो आपकी क्या ली जाए


कोई तरक़ीब तो निकलेगी ही गर सोचेंगे

नाक भी बाकी रहे मै भी उड़ा ली जाए


इश्क़ की जंग में ऐसा हो तो क्या हो के अगर

तीर चल जाए मगर वार ही खाली जाए


ज़िन्दगी चार ही दिन की है भले ग़ाफ़िल जी

क्यूँ मगर दर से कोई खाली सवाली जाए


-‘ग़ाफ़िल’

4 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 6 अक्टूबर 2021 को लिंक की जाएगी ....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
    !

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  2. वाह..... अतिसुंदर

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  3. बहुत उम्दा सार्थक शेर, लाजवाब।

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