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गुरुवार, दिसंबर 20, 2012

मैं ग़ाफ़िल यूँ भी ख़ुश हूँ

(पृष्ठभूमि-चित्र गूगल से साभार)

कमेंट बाई फ़ेसबुक आई.डी.

9 टिप्‍पणियां:





  1. मैं ग़ाफ़िल यूँ भी ख़ुश हूँ
    अच्छा है !

    ... लेकिन अक्षर साफ़ नहीं दिखाई दे रहे ।

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    इसका लिंक आज चर्चा मंच पर भी है।

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  3. वाह ....बहुत खूब गुरु जी।

    आज कल आप मेरे ब्लॉग पर नही आये ...आइयेगा मेरी नई कविता आपके इंतज़ार में है: नम मौसम, भीगी जमीं ..

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  4. बहुत खूब, अच्छे लोग भी ज्यादा याद किये जाते हैं ज्यादा बुरे लोग भी!!

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