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ग़ाफ़िल

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Babhnan, Gonda, Uttar Pradesh, India

Tuesday, June 11, 2013

कोई मुझे रुला गया

किसी की जान जा रही किसी को लुत्फ़ आ गया
कोई सिसक सिसक रहा कोई है गीत गा गया

मज़ार दीपकों की रोशनी में हैं खिले मगर
किसी की ज़िन्दगी को अन्धकार थपथपा गया

किसी की मांग धुल रही किसी की सेज सज गयी
कोई यहाँ से जा रहा कोई यहाँ पे आ गया

यहीं पे जीत हार है यहीं पे द्वेष प्यार है
कोई किसी को भा गया कोई किसी को भा गया

अगर कहें तो है अज़ीब रंगतों का ये जहाँ
कोई मुझे हँसा रहा कोई मुझे रुला गया

-‘ग़ाफ़िल’

20 comments:

  1. वाह बहुत बढिया

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  2. बहुत खूब, खूबशूरत अहसाह

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  3. आपकी यह पोस्ट आज के (१२ जून, २०१३) ब्लॉग बुलेटिन - शहीद रेक्स पर प्रस्तुत की जा रही है | बधाई

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज बुधवार (12-06-2013) को बुधवारीय चर्चा --- अनवरत चलती यह यात्रा बारिश के रंगों में "मयंक का कोना" पर भी है!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  5. बहुत अच्छी प्रस्तुति.
    गाफिल जी ने छेड दिये फिर दिल कतार
    दिल के कोने से आके फिर कोई रुला गया..

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  6. मुझे आप को सुचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि
    आप की ये रचना 14-06-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल
    पर लिंक की जा रही है। सूचनार्थ।
    आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाना।

    मिलते हैं फिर शुकरवार को आप की इस रचना के साथ।


    जय हिंद जय भारत...

    कुलदीप ठाकुर...

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  7. क्या बात है, बहुत सुंदर
    बहुत सुंदर


    मीडिया के भीतर की बुराई जाननी है, फिर तो जरूर पढिए ये लेख ।
    हमारे दूसरे ब्लाग TV स्टेशन पर। " ABP न्यूज : ये कैसा ब्रेकिंग न्यूज ! "
    http://tvstationlive.blogspot.in/2013/06/abp.html

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  8. ये जहाँ भी क्या अज़ीब रंगतों का है जहाँ,
    कोई मुझे हंसा रहा, कोई मुझे रुला गया॥
    यही तो जिंदगी है --बहुत खुबसूरत अभिव्यक्ति !
    अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को अनुभव करे मेरी अनुभूति को
    latest post: प्रेम- पहेली
    LATEST POST जन्म ,मृत्यु और मोक्ष !

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  9. ये जहाँ भी क्या अज़ीब रंगतों का है जहाँ,
    कोई मुझे हंसा रहा, कोई मुझे रुला गया॥
    बेहतरीन ..बहुप्रतीक्षित थी ..सादर बढ़ायी के साथ

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  10. आपने लिखा....हमने पढ़ा
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए कल 13/06/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    धन्यवाद!

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  11. ये जहाँ भी क्या अज़ीब रंगतों का है जहाँ,
    कोई मुझे हंसा रहा, कोई मुझे रुला गया॥

    बहुत सुंदर प्रस्तुति,,,

    recent post : मैनें अपने कल को देखा,

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  12. ये जहाँ भी क्या अज़ीब रंगतों का है जहाँ,
    कोई मुझे हंसा रहा, कोई मुझे रुला गया॥
    .....सब अपने ही होते है,.तभी यह सब होता रहता है ..
    ..बहुत बढ़िया रचना

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  13. बहुत सुन्दर....
    कोई मज़ार दीपकों की रोशनी में खिल रही,
    किसी की ज़िन्दगी पे अन्धकार मुस्कुरा गया।
    कोमल अभिव्यक्ति...
    सादर
    अनु

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  14. यहीं पे जीत हार है, यहीं पे द्वेष प्यार है,
    कोई किसी को भा गया, कोई किसी को भा गया।
    --
    वाह-वाह क्या बात है ग़ाफ़िल सर!

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  15. किसी की जान जा रही, किसी को लुत्फ़ आ गया।
    कोई सिसक सिसक रहा, कोई है गीत गा गया॥ बहुत सुंदर रचना प्रभावशाली प्रस्तुति

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  16. और यह जहाँ भी क्या अज़ीब रंगतों का है जहाँ,

    "EFFECTIVE PRESENTATION"

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