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गुरुवार, अक्तूबर 10, 2013

पर ग़ज़ल गुनगुनाने को दिल चाहिए

मेरे सपनों में आने को दिल चाहिए
और मुझे आजमाने को दिल चाहिए

बात बिगड़ी हुई भी है बनती मगर
बात बिगड़ी बनाने को दिल चाहिए

याद में मेरी मुद्दत से आए न वे
याद में मेरी आने को दिल चाहिए

बात सुनने सुनाने से हासिल भी क्या
बात सुनने सुनाने को दिल चाहिए

आईना देखते तो हैं सब बारहा
आईना पर दिखाने को दिल चाहिए

होश में जोश आता है किसको भला
होश में जोश लाने को दिल चाहिए

दिल को लूटा है सब ने बड़े शौक से
शौक से दिल लुटाने को दिल चाहिए

बोतलों से ढलाना है आसाँ बहुत
चश्म से मय ढलाने को दिल चाहिए

गोया रिश्ते बनाना तो मामूल है
फिर भी रिश्ते निभाने को दिल चाहिए

एक ग़ाफ़िल ने भी लिख तो डाली ग़ज़ल
पर ग़ज़ल गुनगुनाने को दिल चाहिए

हाँ नहीं तो!

5 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शुक्रवार (11-10-2013) चिट़ठी मेरे नाम की (चर्चा -1395) में "मयंक का कोना" पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का उपयोग किसी पत्रिका में किया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    शारदेय नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं
  2. दिल को लूटा है सब ने बड़े शौक से
    शौक से दिल लुटाने को दिल चाहिए

    एक ग़ाफ़िल ने भी लिख तो डाली ग़ज़ल
    पर ग़ज़ल गुनगुनाने को दिल चाहिए

    क्या बात है गाफिल साहब :

    मार देती है गाफिल की सबको गजल ,

    हुस्न वालों की बस एक नजर चाहिए।

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  3. बात बिगड़ी हुई भी है बनती मगर
    बात बिगड़ी बनाने को दिल चाहिए
    बहोत खूब, गाफिल साहब। बेहद खूबसूरत गज़ल।

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  4. होश में जोश आता है किसको भला
    होश में जोश लाने को दिल चाहिए

    दिल को लूटा है सब ने बड़े शौक से
    शौक से दिल लुटाने को दिल चाहिए
    ​खूबसूरत अल्फाज़ ! बहुत खूब श्री ग़ाफ़िल साब ​

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