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ग़ाफ़िल

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Babhnan, Gonda, Uttar Pradesh, India

Wednesday, February 17, 2016

कुछ अलाहदा शे’र : तक़्दीर देखिए

1-
ऐसी ‘बहार’ क्या न हो जिसमें विसाले यार
हर बार ये ही सोचूँ मैं तक़्दीर देखिए
2-
ज़ख़्मों के मेरे चर्चे थोड़े बहुत हुए भी
चर्चे नहीं हुए गर तो आपकी बदी के
3-
आपके रुख़ पे न जाने क्यूँ है पहरा-ए-हिजाब
वर्ना तो पानी भरे हैं आफ़्ताबो माहताब
3-
वो था रू-ब-रू पै कहा लापता हूँ
कहे जा रही है फ़क़ीर उसको दुनिया
4-
रास्ते का शऊर जिसको नहीं
ख़ाक औरों को रास्ता देगा
5-
जाऊँ मैं कैसे भला कोई बताए उस तक
मैं जिसे ढूँढ रहा हूँ वो मेरा साया है

-‘ग़ाफ़िल’

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