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ग़ाफ़िल

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Babhnan, Gonda, Uttar Pradesh, India

Saturday, March 14, 2020

जो दिख नहीं रहा हूँ वो तो शर्तिया हूँ मैं

पूछो न रोज़ रोज़ के आख़िर में क्या हूँ मैं
सोचो तो सारे मर्ज़ की वैसे दवा हूँ मैं

मौसम कोई भी दिल का हो आओगे पास तो
पाओगे तपते जेठ में पुरवा हवा हूँ मैं

जैसे भी हो वो तुम हो मुझे क्यूँ हो फ़िक़्रो ग़म
कहना ये क्या है बोलो के तुझसे ख़फ़ा हूँ मैं

जो दिख रहा हूँ उसपे हमेशा सवाल उठा
जो दिख नहीं रहा हूँ वो तो शर्तिया हूँ मैं

ग़ाफ़िल रहे हैं वो ही जो कहते रहे हैं यार
आ जा न पास मेरे तेरा आसरा हूँ मैं

-‘ग़ाफ़िल’

10 comments:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में रविवार 15 मार्च 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. बहुत दमदार हैं सर , उम्दा और धारदार | बहुत अच्छे , तेवर कमाल हैं | अब आता रहूंगा सर आपको पढ़ने अनुसरक बन कर जा रहा हूँ

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया अजय भाई आपका हमेशा स्वागत है

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  3. This comment has been removed by the author.

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  4. आदरणीया/आदरणीय आपके द्वारा 'सृजित' रचना ''लोकतंत्र'' संवाद मंच पर( 'लोकतंत्र संवाद' मंच साहित्यिक पुस्तक-पुरस्कार योजना भाग-१ हेतु नामित की गयी है। )

    'बुधवार' १८ मार्च २०२० को साप्ताहिक 'बुधवारीय' अंक में लिंक की गई है। आमंत्रण में आपको 'लोकतंत्र' संवाद मंच की ओर से शुभकामनाएं और टिप्पणी दोनों समाहित हैं। अतः आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य"

    https://loktantrasanvad.blogspot.com/2020/03/blog-post_18.html

    https://loktantrasanvad.blogspot.in/




    टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'बुधवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।


    आवश्यक सूचना : रचनाएं लिंक करने का उद्देश्य रचनाकार की मौलिकता का हनन करना कदापि नहीं हैं बल्कि उसके ब्लॉग तक साहित्य प्रेमियों को निर्बाध पहुँचाना है ताकि उक्त लेखक और उसकी रचनाधर्मिता से पाठक स्वयं परिचित हो सके, यही हमारा प्रयास है। यह कोई व्यवसायिक कार्य नहीं है बल्कि साहित्य के प्रति हमारा समर्पण है। सादर 'एकलव्य'

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  5. लाज़वाब।
    एक एक शेर बेहतरीन।
    शर्तिया हूँ मैं... वाह वाह।
    नई रचना- सर्वोपरि?

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  6. वाह!!!
    बहुत लाजवाब।

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  7. वाह! बेहद उम्दा।

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