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ग़ाफ़िल

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Babhnan, Gonda, Uttar Pradesh, India

Thursday, March 05, 2020

लगी है चोट दिल पर और ये सर पर समझता है

भले अपना तू कह कितना मगर क्या घर समझता है
मुसल्सल हाले दिल तो मील का पत्थर समझता है

समझ में यह नहीं आता के रस्ते का खटारापन
सने ख़ूँ से ये मेरे पा के यह रहबर समझता है

दिखावे के लिए कर ले तग़ाफ़ुल ठीक है गोया
मुझे है इल्म तू जी की मेरे जी भर समझता है

नहीं समझा कहे कितना भी ये माना न जाएगा
तुझे अपना बनाना मेरा तू बेहतर समझता है

जो सर पे हाथ फेरे जा रहा ग़ाफ़िल है चारागर
लगी है चोट दिल पर और ये सर पर समझता है

-‘ग़ाफ़िल’

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