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ग़ाफ़िल

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Babhnan, Gonda, Uttar Pradesh, India

Sunday, May 10, 2020

क्यूँ कहूँ मैं के भला आप तो आते रहिए

कौन कहता है के ता’उम्र किसी के रहिए
हाँ ज़ुरूरी है मगर यह भी के अपने रहिए

दुख की घड़ियाँ ही बताती हैं के सुख चैन के वक़्त
आप सब लोग सुलह-साट से कैसे रहिए

ठौर ये यूँ भी नहीं है के रहें हरदम आप
इक नया ठौर कोई और तलाशे रहिए

अंजुमन आपकी है लुत्फ़ भी है आपका ही
क्यूँ कहूँ मैं के भला आप तो आते रहिए

वार होना ही है जो मौका मिला ग़ाफ़िल जी!
हुस्न वालों से तो हरहाल सँभलते रहिए

-‘ग़ाफ़िल’

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