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ग़ाफ़िल

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Babhnan, Gonda, Uttar Pradesh, India

Tuesday, July 21, 2020

क्या ज़ुरूरी है वो हमारे हों

चाह ये है जो चाँद तारे हों
सारे के सारे बस हमारे हों

जाग जाओगे छोड़ जाएँगे
ख़्वाब कितने भले ही प्यारे हों

अब ज़रा भी न टाला जाएगा
आज उल्फ़त के वारे न्यारे हों

क्या लुभाएगा उनको शब का शबाब
दर्द में दिन न जो गुज़ारे हों

हम हुए उनके हमको होना था
क्या ज़ुरूरी है वो हमारे हों

-‘ग़ाफ़िल’

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