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Tuesday, February 07, 2017

आह! यह क्या से क्या हो गया

बावफ़ा बेवफ़ा हो गया
आह! यह क्या से क्या हो गया

उनसे आँखे मिलीं मेरा जी
ख़ूब था बावरा हो गया

एक क़त्आ-
आप तक़्दीर के हैं धनी
हिज्र में भी नफ़ा हो गया
हिज्र में इख़्तियार आप पर
देखिए आपका हो गया

आपकी रह पे नज़रें रहें
ये नया सिलसिला हो गया

क्या बदलना है कुछ और भी
मुद्दई मुद्दआ हो गया

यार ग़ाफ़िल यहाँ हर कोई
क्यूँ भला सरफिरा हो गया

-‘ग़ाफ़िल’

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