फ़ेसबुक पर अनुसरण करें-

मेरी फ़ोटो

मेरे बारे में अधिक जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

गुरुवार, नवंबर 09, 2017

अपना वह रोज़गार अच्छा था

ख़ैर अब शे’र भी हैं मुट्ठी में
जब था ग़ाफ़िल शिकार अच्छा था
मरना शामो सहर हसीनों पर
अपना वह रोज़गार अच्छा था

-‘ग़ाफ़िल’

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें