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शनिवार, दिसंबर 09, 2017

मगर कल आज सा सस्ता नहीं था

नहीं शबनम था या शोला नहीं था
पता सबको है तू क्या क्या नहीं था

तुझे हम जानते हैं जाने कब से
तू था बदनाम पर ऐसा नहीं था

भले खोटा हो लेकिन चल न पाए
यूँ कल तो एक भी सिक्का नहीं था

थीं गो बेबाकियाँ रिश्तों में फिर भी
कोई नासूर दिखलाता नहीं था

बिका तो कल भी था ग़ाफ़िल कुछ ऐसे
मगर कल आज सा सस्ता नहीं था

-‘ग़ाफ़िल’

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