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Tuesday, July 02, 2019

चाँद का देखना तो बहाना हुआ

हिज्र की धूप सर पे है जब जब चढ़ी
दर्द बढ़कर मेरा शामियाना हुआ
तेरा चेहरा ही देखा किए रात भर
चाँद का देखना तो बहाना हुआ

-‘ग़ाफ़िल’

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