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शुक्रवार, जनवरी 08, 2016

हमारा दिल वो उछालते हैं

ग़ज़ब है पैरों पे रखके देखो
हमारा दिल वो उछालते हैं
हम उनके गोया ग़मों के एवज़
में अपनी हर बाज़ी हारते हैं

-‘ग़ाफ़िल’

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (09-01-2016) को "जब तलक है दम, कलम चलती रहेगी" (चर्चा अंक-2216) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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