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ग़ाफ़िल

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Babhnan, Gonda, Uttar Pradesh, India

Friday, September 07, 2018

जो कहते थे के हम आया करेंगे

भले कुछ हैं जो भरमाया करेंगे
मुसाफ़िर मंज़िलें पाया करेंगे

हम उश्शाक़ों का फिर होगा भला क्या
अगर आप ऐसे बिसराया करेंगे

तसव्वुर क्या जहाँ जब आप चाहें
इशारा हो हम आ जाया करेंगे

क़रार आए करेंगे क्या कुछ ऐसा
के आप ऐसे ही मुस्‍काया करेंगे

न आए वो किया क्‍या जाए ग़ाफ़िल
जो कहते थे के हम आया करेंगे

-'ग़ाफ़िल'

1 comment:

  1. निमंत्रण विशेष :

    हमारे कल के ( साप्ताहिक 'सोमवारीय' अंक 'सोमवार' १० सितंबर २०१८ ) अतिथि रचनाकारआदरणीय "विश्वमोहन'' जी जिनकी इस विशेष रचना 'साहित्यिक-डाकजनी' के आह्वाहन पर इस वैचारिक मंथन भरे अंक का सृजन संभव हो सका।

    यह वैचारिक मंथन हम सभी ब्लॉगजगत के रचनाकारों हेतु अतिआवश्यक है। मेरा आपसब से आग्रह है कि उक्त तिथि पर मंच पर आएं और अपने अनमोल विचार हिंदी साहित्य जगत के उत्थान हेतु रखें !

    'लोकतंत्र' संवाद मंच साहित्य जगत के ऐसे तमाम सजग व्यक्तित्व को कोटि-कोटि नमन करता है। अतः 'लोकतंत्र' संवाद मंच आप सभी का स्वागत करता है। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

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