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ग़ाफ़िल

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Babhnan, Gonda, Uttar Pradesh, India

Saturday, April 13, 2019

आप ही का

साहिल हैं आपके ही दर्या है आप ही का
सैलाबो मौज सारा जलसा है आप ही का

मेरा के आपका है ये है सवाल ही क्यूँ
हूँ मैं जब आपका तो मेरा है आप ही का

कैसे लगाई आतिश कितने जलाए जज़्बे
जो सुन रहे हो मुझसे किस्सा है आप ही का

कर लीजिए गुलाबी कालिख के पोत लीजे
हैं रंग आपके ही चेहरा है आप ही का

रुस्वाइयों से आख़िर ग़ाफ़िल जी उज़्र क्यूँ है
चर्चा भी तो ज़ियादः होता है आप ही का

-‘ग़ाफ़िल’

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