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मंगलवार, नवंबर 10, 2015

पर कठिन है प्यार का इज़हार करना

है यही सच के है आसाँ प्यार करना
पर कठिन है प्यार का इज़हार करना

आप मेरे दर से हो दूरी बनाए
सोच क्या है? वस्ल को दुश्वार करना!

एक क्यूँ इस्रार कर कमतर हो ज़ाहिर
दूसरे की ज़िद हो जब इंकार करना

आईने को तोड़ देना वाक़ई में
ख़ुद की ही सूरत को है बेकार करना

चाँद भी तो सोचता होगा, कोई शब
मौज़ करना, ठाट से इतवार करना

क़ाइदन बेपर्दगी अच्छी नहीं पर
हो सके तो बरहना रुख़सार करना

अब तलक हूँ शाद के रब मिह्रबाँ है
आपकी फ़ित्रत गो है बीमार करना

क्या भला ग़ाफ़िल सा होगा और कोई
आपको, इक था न ख़िदमतगार करना?

-‘ग़ाफ़िल’

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