फ़ेसबुक पर अनुसरण करें-

मेरी फ़ोटो

मेरे बारे में अधिक जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

सोमवार, नवंबर 09, 2015

याद तेरी है तो दीवाली है

फ़र्क़ क्या है के रात काली है
याद तेरी है तो दीवाली है

मद भरे चश्म का तसव्वुर कर
मैंने भी तिश्नगी मिटा ली है

पा मेरे तब ही लड़खड़ाए हैं
जब भी तूने निगाह डाली है

रू-ब-रू है मेरा दिले नादाँ
और तेरी नज़र दुनाली है

अक्स तेरा उभर रहा हर सू
शायद अब नींद आने वाली है

आईने पर नज़र न कर ग़ाफ़िल
क्यूँकि तेरी नज़र सवाली है

-‘ग़ाफ़िल’

4 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, तीन साधू - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" मंगलवार 10 नवम्बबर 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  3. रू-ब-रू है मेरा दिले नादाँ
    और तेरी नज़र दुनाली है
    वाह, बहत खूब।

    उत्तर देंहटाएं
  4. क्या बात है !.....बेहद खूबसूरत रचना....
    आप को दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनाएं...
    नयी पोस्ट@आओ देखें मुहब्बत का सपना(एक प्यार भरा नगमा)
    नयी पोस्ट@धीरे-धीरे से

    उत्तर देंहटाएं