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ग़ाफ़िल

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Babhnan, Gonda, Uttar Pradesh, India

Saturday, January 21, 2017

मिस्ले नाली नदी हो गई

क्या कहूँ दिल्लगी हो गई
मेरी शब और की हो गई

जाएगी किस तरफ़ क्या पता
ज़िन्दगी सिरफिरी हो गई

क्या करोगे भला दोस्त जब
बात ही लिजलिजी हो गई

वक़्त का ही करिश्मा है जो
मिस्ले नाली नदी हो गई

ये ले ग़ाफिल तेरी भी ग़ज़ल
कुछ जली, कुछ बुझी, हो गई

-‘ग़ाफ़िल’

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