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सोमवार, जनवरी 23, 2017

अंदेशः

आदाब!

मैंने आवाज़ लगा दी, है मगर अंदेशः
सोचूँ कब तेरे दर आवाज़ मेरी जाती है

‘-ग़ाफ़िल’

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