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ग़ाफ़िल

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Babhnan, Gonda, Uttar Pradesh, India

Wednesday, August 16, 2017

मेरा सम्मान अब होने लगा है

ज़रा नुक़्सान अब होने लगा है
कोई नादान अब होने लगा है

किसी के प्यार की बारिश बिना दिल
जूँ रेगिस्तान अब होने लगा है

न जाने क्यूँ, जो आँसू आईना था
वो बेईमान अब होने लगा है

सिफ़त मेरी है या है मर्तबे की
मेरा सम्मान अब होने लगा है

रिवाज़े डांस है, गाना-बज़ाना
बिना सुर-तान अब होने लगा है

ख़याल उम्दा ही ये होगा बरहना
अगर इंसान अब होने लगा है

तसव्वुर से ही तेरे वक़्त ग़ाफ़िल
अहा! आसान अब होने लगा है

-‘ग़ाफ़िल’

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