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ग़ाफ़िल

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Babhnan, Gonda, Uttar Pradesh, India

Thursday, August 24, 2017

ज़ुर्अत क्यूँ नहीं करते

हमें उनसे शिक़ायत थी, शिक़ायत है, रहेगी भी
के वे मुझसे मेरी कोई शिक़ायत क्यूँ नहीं करते
भले घुट घुट के ही जीना पड़े पर मैं न पूछूँगा
के मुझको अब सताने की वो ज़ुर्अत क्यूँ नहीं करते

-‘ग़ाफ़िल’

1 comment:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (25-08-2017) को "पुनः नया अध्याय" (चर्चा अंक 2707) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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