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Thursday, June 22, 2017

क्यूँ उधर जाऊँ

आदाब अर्ज़ है!

हुस्न भी गो प्यार की है बात करता
पर लगे है बात उसकी दोगली है
और पत्थर सह नहीं पाऊँगा तो फिर
क्यूँ उधर जाऊँ जिधर उसकी गली है

-‘ग़ाफ़िल’

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