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रविवार, जून 17, 2018

और कुछ पी लूँ अभी होश में आने के लिए

याद करने के लिए हो के भुलाने के लिए
छोड़ कर कुछ भी तो जा यार ज़माने के लिए

मिस्ले दुनिया ही है ऐ दोस्त मेरा मैख़ाना
लोग आते ही यहाँ रोज़ हैं जाने के लिए

बस यही शिक़्वे ज़रा चंद मुहर्रम के गीत
और क्या कुछ न रहा मुझको सुनाने के लिए

कोई कुटिया हो के हो कोई महल मरमर का
एक चिंगारी ही काफी है जलाने के लिए

होश में हूँ गो मगर जी तो यही कहता है
और कुछ पी लूँ अभी होश में आने के लिए

खेल जाएगा ये ग़ाफ़िल तू कहे तो जी पर
तेरी उम्मीद तेरा ख़्वाब सजाने के लिए

-‘ग़ाफ़िल’

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