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बुधवार, जून 06, 2018

आज हम लेकिन दोराहे पर मिले

शख़्स कोई शम्स से क्यूँकर मिले
और फिर वह गर लगाकर पर मिले

राह का जिनको हुनर कुछ भी न था
ऐसे ही सब मील के पत्थर मिले

दर्दे दिल मेरा बढ़ाए ही कुछ और
आह इसी ख़ूबी के चारागर मिले

साथ चलना था शुरू से ही हुज़ूर
आज हम लेकिन दोराहे पर मिले

सामना ग़ाफ़िल करेगा किस तरह
तुझसे गर ग़ाफ़िल कोई बेहतर मिले

-‘ग़ाफ़िल’

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