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ग़ाफ़िल

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Babhnan, Gonda, Uttar Pradesh, India

Tuesday, April 26, 2016

सुनो! बस हुक़्म दो! चाहोगे जो, बेहतर दिखा देंगे

जो यह पूछे हो के हम इश्क़ में क्या कर दिखा देंगे
सुनो! बस हुक़्म दो! चाहोगे जो, बेहतर दिखा देंगे
हैं ग़ाफ़िल तो मगर इतने भी हम ग़ाफ़िल नहीं हैं के
तुम्हारी तिश्नगी हो और हम सागर दिखा देंगे

-‘ग़ाफ़िल’

6 comments:

  1. स्वीकार भी अस्वीकार भी कसमकस इश्के खासियत हमारी ।
    मौहब्बत रागिनी फिर विरह दिल जख्म न दे गुजारिश हमारी ।।
    बहुत गजब का अंदाज ।आभार ।

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  2. वाह्ह्ह्ह वाह्ह्ह्ह लाजवाब

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  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (27-04-2016) को "हम किसी से कम नहीं" (चर्चा अंक-2325) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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