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Monday, August 13, 2018

क्या ये सच है के दार होता है

कौन अब ग़मग़ुसार होता है
ज़ेह्न पर बस ग़ुबार होता है

ख़ार जी में है फूल बातों में
यूँ ही दुनिया में यार होता है

हों न अश्आर दोगले क्यूँ जब
सर वज़ीफ़ा सवार होता है

आज के दौर में तो हाए ग़ज़ब
इश्क़ भी क़िस्तवार होता है

कू-ए-जाना के बाद ग़ाफ़िल जी
क्या ये सच है के दार होता है

-‘ग़ाफ़िल’

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