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ग़ाफ़िल

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Babhnan, Gonda, Uttar Pradesh, India

Wednesday, April 18, 2018

रात तन्हा मगर गुज़रती है

जिस्म जलता है जाँ तड़पती है
मौत आ जा कमी तेरी ही है

जिसको गाया नहीं कोई अबतक
वो ग़ज़ल ज़िन्दगी की मेरी है

जाके देखेगा होगा तब मालूम
है वो मंज़िल के उसके जैसी है

इतने अह्बाब हैं तेरे ग़ाफि़ल
रात तन्हा मगर गुज़रती है

-‘ग़ाफ़िल’

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