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ग़ाफ़िल

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Babhnan, Gonda, Uttar Pradesh, India

Monday, April 16, 2018

ग़ैर चाहे भी तो क्या लूटे हमें

फिर भी शिक़्वा है कहाँ उनसे हमें
गो गए छोड़ हर इक अपने हमें

साथ उनके ही शबे हिज़्र बहुत
उनके अश्वाक़ भी याद आए हमें

मेरे अपनों ने है ऐसे लूटा
ग़ैर चाहे भी तो क्या लूटे हमें

-‘ग़ाफ़िल’

(अश्वाक़=शौक़ का बहुवचन)

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