फ़ेसबुक पर अनुसरण करें-

ग़ाफ़िल

My photo
Babhnan, Gonda, Uttar Pradesh, India

Wednesday, August 03, 2011

जो तोड़ी गयी है वो नाज़ुक कली है

तेरे सिम्त सजती हैं बज़्मे-बहाराँ,
मेरे सू तो मेरी ही शैदादिली है।
तुझे हो मुबारक़ ज़माने की रँगत,
ता'हद्दे-नज़र मेरे स्याही खिली है॥

नयी क़ैफ़ियत ये नये दौर की है,
तिहीदस्ती फ़ैय्याज़ों में जोर की है।
समन्दर के दर पे भी जा करके देखा,
मेरी प्यास उससे कहीं भी भली है॥

वो ताबानी सूरज की बदली में गुम है,
चमक चाँदनी की भी जुगुनू से कम है।
हैं दरिया की लहरें सराबी-शिगूफा,
सज़र भी हैं मुफ़लिस, हवा बद चली है॥

गया सूख बेवक़्त आँखों का पानी,
नहीं गीत में भी है कोई रवानी।
छमक भी है गायब सभी पायलों से,
पड़ी आज सूनी सी सुर की गली है॥

हुई किस क़दर रात चोरी यहाँ पे,
बता चाँद सबकी है ख़ूबी कहाँ पे।
जो गुल ख़ूबसूरत तो ख़ुश्बू जुदा है,
जो तोड़ी गयी है वो नाज़ुक कली है॥

अगन ने जलाया मेरा आशियाना,
ये ग़ाफ़िल भी है आज कैसा बेगाना।
हरी वादियों का हुआ रंग ख़ूनी,
चिता आल की देखो पहले जली है॥

(सू=तरफ़, तिहीदस्ती=हाथ का खालीपन, फ़ैयाज=दानी, सराबी-शिगूफ़ा=मृगमरीचिका जैसा भ्रम, आल=नाती,पोते)

26 comments:

  1. क्या बात है, बहुत सुंदर। सच कहूं तो मुझे आपकी नई पोस्ट का इंतजार रहता है।

    अगन ने जलाया मेरा आशियाना,
    ग़ाफ़िल भी है आज कैसा बेगाना।
    हरी वादियों का हुआ रंग खूनी,
    चिता आल की सबसे पहले जली है॥

    ReplyDelete
  2. गया सूख बेवक़्त आँखों का पानी,
    नहीं गीत में भी है कोई रवानी।
    छमक भी है गायब सभी पायलों से,
    पड़ी आज सूनी सी सुर की गली है॥


    दिल में कहीं टीस छोड़ गई...

    ReplyDelete
  3. अगन ने जलाया मेरा आशियाना,
    ग़ाफ़िल भी है आज कैसा बेगाना।
    हरी वादियों का हुआ रंग खूनी,
    चिता आल की सबसे पहले जली है॥
    bahut badhiyaa

    ReplyDelete
  4. छमक भी है गायब सभी पायलों से,
    पड़ी आज सूनी सी सुर की गली है॥

    अगन ने जलाया मेरा आशियाना,
    ग़ाफ़िल भी है आज कैसा बेगाना।

    बहुत सुन्दर ||
    बधाई |

    ReplyDelete
  5. हुई किस क़दर रात चोरी यहाँ पे,
    बता चाँद सबकी है ख़ूबी कहाँ पे।
    जो गुल ख़ूबसूरत तो ख़ुश्बू जुदा है,
    जो तोड़ी गयी है वो नाज़ुक कली है॥

    क्या बात...क्या बात....

    ReplyDelete
  6. अगन ने जलाया मेरा आशियाना,
    ग़ाफ़िल भी है आज कैसा बेगाना।
    हरी वादियों का हुआ रंग खूनी,
    चिता आल की सबसे पहले जली है॥

    Excellent creation !

    Very appealing lines and quite meaningful as well. Loving it .

    .

    ReplyDelete
  7. हुई किस क़दर रात चोरी यहाँ पे,
    बता चाँद सबकी है ख़ूबी कहाँ पे।
    जो गुल ख़ूबसूरत तो ख़ुश्बू जुदा है,
    जो तोड़ी गयी है वो नाज़ुक कली है॥
    --
    बहुत ही नाज़ुक अशआरों से सँवारी है आपने यह रचना!

    ReplyDelete
  8. अगन ने जलाया मेरा आशियाना,
    ग़ाफ़िल भी है आज कैसा बेगाना।
    हरी वादियों का हुआ रंग खूनी,
    चिता आल की सबसे पहले जली है॥

    Bemisal... Bahut hi sunder

    ReplyDelete
  9. गया सूख बेवक़्त आँखों का पानी,
    नहीं गीत में भी है कोई रवानी।
    छमक भी है गायब सभी पायलों से,
    पड़ी आज सूनी सी सुर की गली है॥
    bahut sundar bhavaabhivyakti

    ReplyDelete
  10. तेरे सिम्त सजती हैं बज़्मे-बहाराँ,
    मेरे सू तो मेरी ही शैदादिली है।

    सर, कैसी सुन्दर रवानगी है....
    आपको पढ़ना आनंद देता है.... शिक्षा भी...
    सादर...

    ReplyDelete
  11. kya kahun har ek line ko baar baar padhne ko man karta hai.humesha ki tarah behtreen ghazal.

    ReplyDelete
  12. गया सूख बेवक़्त आँखों का पानी,
    नहीं गीत में भी है कोई रवानी।
    छमक भी है गायब सभी पायलों से,
    पड़ी आज सूनी सी सुर की गली है॥

    दिल की गहराईयों को छूने वाली बेहद खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

    ReplyDelete
  13. बड़ी बहर [122 x 8] की शानदार ग़ज़ल| बहुत खूब| जिस तरह छोटी बहर में ग़ज़ल कहना कठिन होता है, उसी तरह बड़ी बहर का निर्वाह करने में भी काफ़ी पसीना बहाना पड़ता है| नमन|

    ReplyDelete
  14. वाह बहुत ही सुन्दर
    रचा है आप ने
    क्या कहने ||

    ReplyDelete
  15. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है , कृपया पधारें
    चर्चा मंच

    ReplyDelete
  16. वाह ...बहुत ही अच्‍छा लिखा है आपने ।

    ReplyDelete
  17. बहुत ही सुन्दर पोस्ट....

    ReplyDelete
  18. क्या बात है!...वाह

    ReplyDelete
    Replies
    1. हुई किस क़दर रात चोरी यहाँ पे,
      बता चाँद सबकी है ख़ूबी कहाँ पे।
      जो गुल ख़ूबसूरत तो ख़ुश्बू जुदा है,
      जो तोड़ी गयी है वो नाज़ुक कली है॥

      बहुत ही बेहतरीन अशआर हैं ! हर शब्द दिल पर असर करता है ! बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनायें !

      Delete
  19. बहुत सुन्दर रचना है.

    ReplyDelete
  20. वो ताबानी सूरज की बदली में गुम है,
    चमक चाँदनी की भी जुगुनू से कम है।
    हैं दरिया की लहरें सराबी-शिगूफा,
    सज़र भी हैं मुफ़लिस, हवा बद चली है॥
    गाफिल जी, कलेजा चीर कर लिखते हैं.सीधे हमारा भी कलेजा चीर देते हैं,वाह !!!

    ReplyDelete
  21. बेहद खूबसूरत..बेहतरीन

    ReplyDelete
  22. गया सूख बेवक़्त आँखों का पानी,
    नहीं गीत में भी है कोई रवानी।
    छमक भी है गायब सभी पायलों से,
    पड़ी आज सूनी सी सुर की गली है॥

    ...sach vqkt ke saath sabkuch badal jaane mein der kahan lagti hain..
    ..bahut sundar chintansheel prastuti..

    ReplyDelete
  23. हुई किस क़दर रात चोरी यहाँ पे,
    बता चाँद सबकी है ख़ूबी कहाँ पे।
    जो गुल ख़ूबसूरत तो ख़ुश्बू जुदा है,
    जो तोड़ी गयी है वो नाज़ुक कली है॥
    बेहतरीन सुन्दर रचना है

    ReplyDelete