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बुधवार, अगस्त 03, 2011

जो तोड़ी गयी है वो नाज़ुक कली है

तेरे सिम्त सजती हैं बज़्मे-बहाराँ,
मेरे सू तो मेरी ही शैदादिली है।
तुझे हो मुबारक़ जमाने की रँगत,
ता'हद्दे-नज़र मेरे स्याही खिली है॥

नयी क़ैफ़ियत ये नये दौर की है,
तिहीदस्ती फ़ैय्याज़ों में जोर की है।
समन्दर के दर पे भी जा करके देखा,
मेरी प्यास उससे कहीं भी भली है॥

वो ताबानी सूरज की बदली में गुम है,
चमक चाँदनी की भी जुगुनू से कम है।
हैं दरिया की लहरें सराबी-शिगूफा,
सज़र भी हैं मुफ़लिस, हवा बद चली है॥

गया सूख बेवक़्त आँखों का पानी,
नहीं गीत में भी है कोई रवानी।
छमक भी है गायब सभी पायलों से,
पड़ी आज सूनी सी सुर की गली है॥

अगन ने जलाया मेरा आशियाना,
ग़ाफ़िल भी है आज कैसा बेगाना।
हरी वादियों का हुआ रंग खूनी,
चिता आल की सबसे पहले जली है॥

हुई किस क़दर रात चोरी यहाँ पे,
बता चाँद सबकी है ख़ूबी कहाँ पे।
जो गुल ख़ूबसूरत तो ख़ुश्बू जुदा है,
जो तोड़ी गयी है वो नाज़ुक कली है॥

(सू=तरफ़, तिहीदस्ती=हाथ का खालीपन, फ़ैयाज=दानी, सराबी-शिगूफ़ा=मृगमरीचिका जैसा भ्रम, आल=नाती,पोते)
                                                                            -‘ग़ाफ़िल’

26 टिप्‍पणियां:

  1. क्या बात है, बहुत सुंदर। सच कहूं तो मुझे आपकी नई पोस्ट का इंतजार रहता है।

    अगन ने जलाया मेरा आशियाना,
    ग़ाफ़िल भी है आज कैसा बेगाना।
    हरी वादियों का हुआ रंग खूनी,
    चिता आल की सबसे पहले जली है॥

    उत्तर देंहटाएं
  2. गया सूख बेवक़्त आँखों का पानी,
    नहीं गीत में भी है कोई रवानी।
    छमक भी है गायब सभी पायलों से,
    पड़ी आज सूनी सी सुर की गली है॥


    दिल में कहीं टीस छोड़ गई...

    उत्तर देंहटाएं
  3. अगन ने जलाया मेरा आशियाना,
    ग़ाफ़िल भी है आज कैसा बेगाना।
    हरी वादियों का हुआ रंग खूनी,
    चिता आल की सबसे पहले जली है॥
    bahut badhiyaa

    उत्तर देंहटाएं
  4. छमक भी है गायब सभी पायलों से,
    पड़ी आज सूनी सी सुर की गली है॥

    अगन ने जलाया मेरा आशियाना,
    ग़ाफ़िल भी है आज कैसा बेगाना।

    बहुत सुन्दर ||
    बधाई |

    उत्तर देंहटाएं
  5. हुई किस क़दर रात चोरी यहाँ पे,
    बता चाँद सबकी है ख़ूबी कहाँ पे।
    जो गुल ख़ूबसूरत तो ख़ुश्बू जुदा है,
    जो तोड़ी गयी है वो नाज़ुक कली है॥

    क्या बात...क्या बात....

    उत्तर देंहटाएं
  6. अगन ने जलाया मेरा आशियाना,
    ग़ाफ़िल भी है आज कैसा बेगाना।
    हरी वादियों का हुआ रंग खूनी,
    चिता आल की सबसे पहले जली है॥

    Excellent creation !

    Very appealing lines and quite meaningful as well. Loving it .

    .

    उत्तर देंहटाएं
  7. हुई किस क़दर रात चोरी यहाँ पे,
    बता चाँद सबकी है ख़ूबी कहाँ पे।
    जो गुल ख़ूबसूरत तो ख़ुश्बू जुदा है,
    जो तोड़ी गयी है वो नाज़ुक कली है॥
    --
    बहुत ही नाज़ुक अशआरों से सँवारी है आपने यह रचना!

    उत्तर देंहटाएं
  8. अगन ने जलाया मेरा आशियाना,
    ग़ाफ़िल भी है आज कैसा बेगाना।
    हरी वादियों का हुआ रंग खूनी,
    चिता आल की सबसे पहले जली है॥

    Bemisal... Bahut hi sunder

    उत्तर देंहटाएं
  9. गया सूख बेवक़्त आँखों का पानी,
    नहीं गीत में भी है कोई रवानी।
    छमक भी है गायब सभी पायलों से,
    पड़ी आज सूनी सी सुर की गली है॥
    bahut sundar bhavaabhivyakti

    उत्तर देंहटाएं
  10. तेरे सिम्त सजती हैं बज़्मे-बहाराँ,
    मेरे सू तो मेरी ही शैदादिली है।

    सर, कैसी सुन्दर रवानगी है....
    आपको पढ़ना आनंद देता है.... शिक्षा भी...
    सादर...

    उत्तर देंहटाएं
  11. kya kahun har ek line ko baar baar padhne ko man karta hai.humesha ki tarah behtreen ghazal.

    उत्तर देंहटाएं
  12. गया सूख बेवक़्त आँखों का पानी,
    नहीं गीत में भी है कोई रवानी।
    छमक भी है गायब सभी पायलों से,
    पड़ी आज सूनी सी सुर की गली है॥

    दिल की गहराईयों को छूने वाली बेहद खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

    उत्तर देंहटाएं
  13. बड़ी बहर [122 x 8] की शानदार ग़ज़ल| बहुत खूब| जिस तरह छोटी बहर में ग़ज़ल कहना कठिन होता है, उसी तरह बड़ी बहर का निर्वाह करने में भी काफ़ी पसीना बहाना पड़ता है| नमन|

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  14. वाह बहुत ही सुन्दर
    रचा है आप ने
    क्या कहने ||

    उत्तर देंहटाएं
  15. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है , कृपया पधारें
    चर्चा मंच

    उत्तर देंहटाएं
  16. वाह ...बहुत ही अच्‍छा लिखा है आपने ।

    उत्तर देंहटाएं
  17. उत्तर
    1. हुई किस क़दर रात चोरी यहाँ पे,
      बता चाँद सबकी है ख़ूबी कहाँ पे।
      जो गुल ख़ूबसूरत तो ख़ुश्बू जुदा है,
      जो तोड़ी गयी है वो नाज़ुक कली है॥

      बहुत ही बेहतरीन अशआर हैं ! हर शब्द दिल पर असर करता है ! बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनायें !

      हटाएं
  18. वो ताबानी सूरज की बदली में गुम है,
    चमक चाँदनी की भी जुगुनू से कम है।
    हैं दरिया की लहरें सराबी-शिगूफा,
    सज़र भी हैं मुफ़लिस, हवा बद चली है॥
    गाफिल जी, कलेजा चीर कर लिखते हैं.सीधे हमारा भी कलेजा चीर देते हैं,वाह !!!

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  19. बेहद खूबसूरत..बेहतरीन

    उत्तर देंहटाएं
  20. गया सूख बेवक़्त आँखों का पानी,
    नहीं गीत में भी है कोई रवानी।
    छमक भी है गायब सभी पायलों से,
    पड़ी आज सूनी सी सुर की गली है॥

    ...sach vqkt ke saath sabkuch badal jaane mein der kahan lagti hain..
    ..bahut sundar chintansheel prastuti..

    उत्तर देंहटाएं
  21. हुई किस क़दर रात चोरी यहाँ पे,
    बता चाँद सबकी है ख़ूबी कहाँ पे।
    जो गुल ख़ूबसूरत तो ख़ुश्बू जुदा है,
    जो तोड़ी गयी है वो नाज़ुक कली है॥
    बेहतरीन सुन्दर रचना है

    उत्तर देंहटाएं