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सोमवार, अगस्त 08, 2011

शोले को नहाते देखा

नज़र से मिल के इक नज़र को लजाते देखा।
मखमली दस्त से खंजर को छुपाते देखा॥

डसके बलखाती हुई कौन गयी नागन इक,
होश हँसते हुए इस दिल को गँवाते देखा।

लपट सी उठ रही थी उसके ग़ुस्लख़ाने से,
जो गया पास तो शोले को नहाते देखा।

तेरा क्या ऐ जुनूने- इश्क़! कुछ हमारी सुन,
मिस्ले- अख़्गर हमीं ने ख़ुद को जलाते देखा।

तेरी तरह ही हुई जा रही कुदरत ग़ाफ़िल,
दिल पे सौ बिजलियाँ जुल्फ़ों को गिराते देखा॥
(मिस्ले-अख़्ग़र=पतिंगे के समान)
                               -'ग़ाफ़िल'

22 टिप्‍पणियां:

  1. डसके बलखाती हुई कौन गयी नागन इक,
    होश हँसते हुए इस दिल को गँवाते देखा।

    बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं
  2. तेरा क्या ऐ जुनूने- इश्क़! कुछ हमारी सुन,
    मिस्ले- अख़्गर हमीं ने ख़ुद को जलाते देखा।


    अंतर्मन को उद्देलित करती पंक्तियाँ, बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो
    चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  4. तेरा क्या ऐ जुनूने- इश्क़! कुछ हमारी सुन,
    मिस्ले- अख़्गर हमीं ने ख़ुद को जलाते देखा।...बहुत खूब गाफिल जी.......

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  5. वाह बेहतरीन !!!!
    बहुत खूब गाफिल जी...

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  6. तेरी तरह ही हुई जा रही कुदरत ग़ाफ़िल,
    दिल पे सौ बिजलियाँ जुल्फ़ों को गिराते देखा॥
    Bahut khoob..wah!!!!!

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  7. अच्छा लगा इसे ग़ज़ल को पढ़ना।

    उत्तर देंहटाएं
  8. नज़र से मिल के इक नज़र को लजाते देखा।
    मखमली दस्त से खंजर को छुपाते देखा॥

    डसके बलखाती हुई कौन गयी नागन इक,
    होश हँसते हुए इस दिल को गँवाते देखा।

    बहुत खूब गाफ़िल जी..

    उत्तर देंहटाएं
  9. touché! unexampled, truely awesome ghazal.....real magnum opus!...thanxtouché! unexampled, truely awesome ghazal.....real magnum opus!...thanx

    उत्तर देंहटाएं
  10. निवेदन है कि मेरी भी और बेसुरम जैसे ब्लॉग के लिंक,जिनपर आप फिलहाल कुछ पोस्ट नहीं कर रहे हैं,हटा दें।

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  11. लपट सी उठ रही थी उसके ग़ुस्लख़ाने से,
    जो गया पास तो शोले को नहाते देखा।...aap ki ek aur behtarin ghazal,,dil mast mast ho gaya

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  12. लपट सी उठ रही थी उसके ग़ुस्लख़ाने से,
    जो गया पास तो शोले को नहाते देखा।,,,aap ki ek aur dil ko choo lene wali ghazal...kamal ka likha hai,,,badhayee

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  13. नज़र से मिल के इक नज़र को लजाते देखा।
    मखमली दस्त से खंजर को छुपाते देखा॥

    Awesome !

    .

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  14. लपट सी उठ रही थी उसके ग़ुस्लख़ाने से,
    जो गया पास तो शोले को नहाते देखा।|

    भैया जी !!
    नहाने के लिए कौन सी सामग्री
    इस्तेमाल की जा रही है ??

    उत्तर देंहटाएं
  15. उफ !

    अरे आप तो
    बिल्कुल भी
    नहीं शर्माते हैं
    शोले को
    नहाते हुऎ
    देखने के लिये
    कैसे चले जाते हैं?

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    उत्तर
    1. शुशील भाई अनपेक्षित जगह पर उठ रही आग की लपटों को देख कर कोई भी जिम्मेदार और सभ्य व्यक्ति वहां जाकर देखना चाहेगा कि माज़रा क्या है? कहीं कोई बुरा हादिसा तो नहीं हो गया? इसमें शर्म जैसी कोई बात ही नहीं है...फिर भी आपकी टिप्पणी बेशक़ीमती है...

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  16. दीवाने-आलम दिले-आजार न होते..,
    दीदा महरूम हैं सरकार वर्ना दीदार न होते.....

    उत्तर देंहटाएं
  17. लपट सी उठ रही थी उसके ग़ुस्लख़ाने से,
    जो गया पास तो शोले को नहाते देखा।
    नज़र से मिल के इक नज़र को लजाते देखा।
    मखमली दस्त से खंजर को छुपाते देखा॥
    बढ़िया शैर हैं पहले में बिहारी की विरह उत्तप्त नायिका याद आ गई जिसके विरह की अग्नि से इत्र फुलेल की शीशी भर इत्र नायिका पर उड़ेलने से पहले ही भाप बन उड़ जाती थी .
    सोमवार, 10 सितम्बर 2012
    आलमी हो गई है रहीमा शेख की तपेदिक व्यथा -कथा (आखिरी से पहली किस्त
    .

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