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ग़ाफ़िल

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Babhnan, Gonda, Uttar Pradesh, India

Tuesday, August 23, 2011

मंजिल वही पुरानी है

नयी है राह पै मंजिल वही पुरानी है
नयी सी जिल्‍द में लिपटी वही कहानी है

नये से रूप में गिरधर भी है वही यारो
नये लिबास में मीरा वही दीवानी है

नया सा सुर है पै सरगम वही पुराना है
नयी सी ताल पे नचती वही जवानी है

न कुछ नया है पुराना भी कुछ नहीं है यहाँ
जुनूने रब्त है औ रब्त में रवानी है

ये शब भी वस्ल की ग़ाफ़िल है मुख़्तसर ही हुई
सहर ने बात ही कब अपनी यार मानी है

-‘ग़ाफ़िल’

23 comments:

  1. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  2. यह शबे-वस्ल भी ग़ाफ़िल! है मुख़्तसर ही हुई,
    मनचले सहर ने की फिर वही नादानी है।
    क्या बात है मिश्रा जी ,बहुत खूब ,कमल की नज्म ,कमल के आप ,रचना और रचनाकार ,दोनों बेमिशाल ......शुक्रिया जी /

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  3. कभी गुस्ताखी शाम करती है -- उन्हें जाने की जल्दी ||
    कभी सहर गुस्ताख हो जाती----करदे आने में जल्दी ||

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  4. बहुत ही उम्दा ग़ज़ल....

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  5. नयी है राह पर मंजिल वही पुरानी है।
    फिर नये ज़िल्द में लिपटी वही कहानी है॥

    Bahut Sunder

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  6. नया सा सुर तो है, सरगम वही पुराना है,
    नयी सी ताल पर नचती वही जवानी है।



    इस नये दौर की अब नई हर कहानी है

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  7. बहुत ही शानदार गज़ल्।

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  8. बेहद उम्दा और शानदार गजल ..

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  9. wah!!!!!!kya baat kahi aapane...bahut khoob..

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  11. बहुत उम्दा गजल... आभार !

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  12. वाह्…………बहुत सुन्दर ख्याल्।

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  13. क्या बात कही है ...
    मनचले सहर ने की फिर वही नादानी है।

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  14. यह शबे-वस्ल भी ग़ाफ़िल! है मुख़्तसर ही हुई,
    मनचले सहर ने की फिर वही नादानी है।
    मकते पर अलग से दाद , मुबारक हो

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  15. नया सा सुर तो है, सरगम वही पुराना है,
    नयी सी ताल पर नचती वही ज aवानी है।..बहुत खूब अंदाज़ आपके ,खूबसूरत अशआर आपके अच्छा लगता है आपके ब्लॉग पे आके . ...जय अन्ना !जय भारत .! हमारे वक्त की आवाज़ अन्ना ,सरकार का ताबूत बनके रहेगा अन्ना . .
    बुधवार, २४ अगस्त २०११
    मुस्लिम समाज में भी है पाप और पुण्य की अवधारणा ./

    http://veerubhai1947.blogspot.com/
    Wednesday, August 24, 2011
    योग्य उत्तराधिकारी की तलाश .
    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/

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  16. इक नये रूप में गिरधर भी वही है यारों,
    नये लिबास में मीरा वही दीवानी है ...

    बहुत खूब ... लाजवाब शेर है ... खूबसूरत अंदाज़ है इस नए रूप के शेर का ...

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  17. वाह क्या बात है ! बहुत सुन्दर ! पूरी ग़ज़ल उम्दा है !

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  18. bht khubsurat gzal h apki....bht khubsurat gzal h apki....

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  19. hm apki gazal k kayal h janab....hm apki gazal k kayal h janab....

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  20. वाह्…………बहुत सुन्दर लाजवाब
    आप मेरे ब्लॉगों में आये आये तो और भी ज्यादा ख़ुशी होगी मुझे भी अगर आप यहाँ की सदस्यता ले तो....

    MITRA-MADHUR
    MADHUR VAANI
    BINDAAS_BAATEN

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