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गुरुवार, अक्तूबर 08, 2015

आप हैं के जवाब भूले हैं

जब तुम्हारी गली में आए हैं
यार पत्थर हज़ार बरसे हैं

हुस्न वालों से मात खा खाकर
इश्क़ में हम कमाल करते हैं

शेखियाँ क्यूँ बघारते हो जब
हम तुम्हारे क़रीब होते हैं

और दीदार को रहा भी क्या
मौत का रक्स ख़ूब देखे हैं

आज वो भी लगा रहे तुह्मत
नाज़ जिनके बहुत उठाए हैं

इश्क़ का है सवाल ग़ाफ़िल जी
आप हैं के जवाब भूले हैं

-‘ग़ाफ़िल’

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